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IIT पर करोड़ो की अनियमिता के मेरे आरोपों को पुख्ता करती कैग की रिपोर्ट,लेकिन कोई नहीं जाँच करने वाला ...

हम तो लूट के मानेगे सनम जब तक साथ है ऊपर वाले का ..... यह लाइन आई आई टी घमंडी के उच्च अधिकारिओ द्वारा कही जा रही है और यहाँ ऊपर वालो से तात्पर्य  ह्यूमन रिसोर्स के उच्च "चीप(चीफ) "अधिकारियो से है....जो आंखे मूंद तमाशा देख रहे है और हम जैसे बेवकूफ लोग चले देश बदलने   ...  आई आई टी मंडी की कार्यप्रणाली की अनियमिता का खुलासा किया लेकिन किसी ने सुध नहीं ली , राज्य सरकार ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाली तो केंद्र सरकार ने एक्शन न लेने की जैसे कसं खायी हुई है और इसी बीच एक और नया खुलासा हुआ जिसकी जानकारी तो मुझे भी नहीं थी  I अब सुचना के अधिकार के तहत आयी गई सुचना से बड़ा खुलासा हुआ है , सुचना में कैग की साल 2014-15, 2015-16 & 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है कि, आई आई टी की  कार्यप्रणाली से सरकर को भारी रेवेनुए का नुकसान झेलना पड़ा वही एजेंसियो को करोर्ड़ो रुपये की जमा को अनियमिता तरीको से रिलीज़ करके फायदा पहुंचाया गया। कैग की 2014-15 की रिपोर्ट में बताया गया की साल 2012-13 में 114.69 लाख जमा की अनियमित तरीके से रिलीज़ की वही स...

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान के साथ छलावा या देश का सबसे बड़ा घोटाला?

किसान परेशान हो रहा है, मिट्टी उगलती थी सोना, ओर बरसता था अमृत आसमा से आज वही अन्नदाता की जान निगल रहा है, देखो, देखो मेरा देश बदल रहा है किसान की बदहाली, बीम कंपनी के मुनाफे में इजाफे का विकास हो रहा है देखो देखो मेरा देश बदल रहा ...मेरा भारत आगे बढ़ रहा है ... किसान गर्त में जा रहा है, किसानी छोड़ वो अब ,जान का व्यापर कर रहा है मेरा देश वाकई बदल रहा है   । भारत एक कृषि प्रधान देश कहा जाता है और कहे भी क्यों न क्योकि यहाँ की मिटटी सोना जो उगलती थी, जिस देश की सत्तर प्रतशत जनता प्रत्यक्ष ओर अप्रत्यक्ष रूप से खेती के ऊपर निर्भर है, उसी मिट्टी से उम्मीदे टूट रही है और इसका फायदा उठा रहे है है सरकार में बैठे लोग, जो किसी की अर्थी पर भी रोटी रख कर खाने का माद्दा रखते है भारत का किसान जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है आज उसकी माली हालत ख़राब है,इसलिए नहीं की वो मेहनत नहीं करता बल्कि इसलिए क्योकि मौसम की मार उससे उसकी खून पसीने की मेहनत एक कर आने वाला परिणाम चंद पलो में छीन लेती है और छोड़ती है तो बस जिम्मेदारी निभाने का तनाव, रसूखदारों का ब्याज, पर...

भ्रष्टाचार से लड़ा कोटा का युवा, आठ महीनो से नहीं सुन रही सरकार

मेरा देश बदल रहा है...भ्रष्ट की जाँच भ्रष्ट कर रहा है  जो हुक्म मेरे आका करने वाला मौज कर रहा है और देश सेवा की प्रतिज्ञा करने वाला रो रहा है.... देखो देखो मेरा देश बदल रहा है .. मंत्री मंत्रालय छोड़ चुनाव में खो रहा है, अधिकारी बंद कमरे में A.C. चला कर सो रहा है  सत्य की राह पर चलने वाला घबरा रहा है, चिराग तले अंधेरा हो रहा है देश की हालत देख भगत सिंह ,सुखदेव, राजगुरु खुद शहादत पर मायूस हो रहा है  देखो देखो मेरा देश ..देखो देखो मेरा भारत बदल रहा है .. देखो देखो मेरा देश ..देखो देखो मेरा भारत बदल रहा है .. यह पंक्तिया आज के इस आज़ाद भारत पर सटीक बैठती है जहाँ बिना पैसे के न्याय नहीं मिलता, वहां गलत के खिलाफ आवाज बुलुंद करने पर क्या हश्र होगा आप सोच सकते हो ... जावड़ेकर साहब राजस्थान के चुनाव प्रभारी ...आप चुनाव छोड़ कर मंत्रालय को सम्भालो और नहीं तो मंत्रालय छोड़ बीजेपी की कोर समिति में ही रहो आपके राज में आई आई टी जैसे संस्थानों में घोटलो की भरमार है...       ( Wrote by someone other ,I am just pasting )   ...

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"केडीएल भगाओ,कोटा बचाओ "आंदोलन को मिल रहा अपार जन सहयोग...

हमतो भर लेंगे तिजोरी तुमको लूटकर, बोलो बचकर कैसे दिखाओगे ... सुनने वाला तुम्हारी यहाँ कोई नहीं, तुम चाह कर भी कुछ न कर पाओगे .. मौन है यहाँ सारे आका तुम्हारे, तुम किससे अर्जी लगवाओगे ... खरीद लिया तुम्हारा सुख "उनसे", तुम बस मजबूर बनके,आंसू ही बहा पाओगे .. स्मार्ट मीटर से आम इंसान की जेब पर झटके देने वाली कंपनी की और से ये लाइन कोटा की जनता पर सटीक बैठती है I      शैक्षणिक नगरी में जहा लाखो विद्यार्थी पुरे देश से हर साल शिक्षा के लिए आते है,उनको अब स्मार्ट मीटर की वजह से ज्यादा किराया देना पड़ रहा है, हजारो युवाओ के रोजगार पर इस स्मार्ट मीटर का असर इतना पड़ा की उनके घर के राशन प् इसका सीधा असर देखने को मिला, चाहे गरीब हो या अमीर, सबकी जेबो पर डाका डाल रहा है यह स्मार्ट मीटर ... लेकिन कोटा के ही एक समाजसेवी एवं राजस्थान नव निर्माण संघठन के अध्यक्ष हिम्मत सिंह हाडा कोटा के दर्द को समझते हुए इस निजी तानाशाही कंपनी को कोटा से हटाने के लिए आंदोलन छेड़ा है, जिसे कोटा की जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है , हिम्मत सिंह हाडा ने चेतनावणी भी दी है यदि यह कंपनी को सरकार...

IIT मंडी में भ्रष्टाचार पर महीनो बाद भी सरकार चुप, विरोध में मुंडवाया सर.....

हमारे देश में भ्रष्टाचार का दीमक सदियों से चला आ रहा है। कई सरकारों ने इसके खिलाफ कड़ा रुख ज़ाहिर कर सत्ता हथियाई, लेकिन सत्ता में आने के बाद हर बार आम जनता को धोखा दिया गया। ऐसी ही कुछ कहानी है मंडी, हिमाचल प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय स्तर की नामी संस्थान आईआईटी मंडी की। जहां अभी बरसात के मौसम में भूचाल आया हुआ है। अक्सर शांत रहने वाले हिमाचल में इन दिनों आरोपों का दौर चला जा रहा है।  मेने एवं एक अधिकारी कर्नल देवांग नाइक ने आईआईटी मंडी में हो रहे कुकर्मों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। गत महीने मीडिया से बात करते हुए बताया कि किस तरह से भाई भतीजावाद आईआईटी में हावी हो रहा है। उसके बाद चहेतों को नौकरी, कर दाता के पैसे की बर्बादी, कर्मचारियों में भेदभाव के साथ-साथ ढेरों अनियमतता आदि पर सबूतों के साथ आईआईटी में हो रहे घोटालों का पर्दाफाश किया। साथ ही सरकार से अपील भी की कि इन सबकी निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए, जिसके लिए चालीस दिन की समय सीमा सरकार को दी गयी। किन्तु देश का दुर्भाग्य है की सरकार ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है, बल्कि आईआईटी मंडी ने हमको कारण ...

रोती आई आई टी, बिलखता हिमाचल .....बचालो स्वार्थी रहनुमाओ से,गन्दा कर दिया इन्होने मेरा आँचल

ऊँचे ऊँचे सपने थे,पंख फैला कर इठलाता यह चला तो था माँ भारती को बचाने एक तिनका पहाड़ से भिड़ा  तो था.. होना क्या था...पहाड़ के इशारो पर उसके रहनुमा हवा के झोंको ने कि कोशिश उड़ाने की तिनके को ....लेकिन तिनका भी कहा डिगा था अपनी जिद पर कट्टर वो तोअड़ा था ... हुआ घमासान.... हिल गयी नीव पहाड़ की...जो सालो से अट्टहास के साथ अकड़ कर खड़ा था तिनका था मासूम और छोटा..रहनुमाओ ने खेला खेल, बड़ा ही खोटा.. प्रयास था तिनके को कमजोर करने का लेकिन.... तिनके की नियत थी साफ और इरादा था ठोस.. पहाड़ का घमंड हुआ चूर जब मिला तिनके को बोस... अब लड़ाई तिनके की है जारी क्योकि रहनुमाओ के साथ पहाड़ के चूर होने की है तैयारी... वक्त ये भी आएगा ..रहनुमाओ का बादशाह काल कोठरी मे गुनगुनाएगा.. वक्त का पहिया है वक्त से चलेगा .. देखना ये है तिनके जो चला था ...कब तक चलेगा... होगी छल, भय की पराकाष्ठा ...तिनका है छोटा सा मासूम ये कब तक सहेगा.... तिनका है छोटा सा मासूम ये कब तक सहेगा...  आई आई टी मंडी में हो बवंडर के बीच तिनके रूपी छोटे से कर्मचारी यानि की मुझे अब मानसिक अस्वस्थ बोलकर जो आप यह आरोप से बच कर ...