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Showing posts from February, 2020

चिंताजनक एवं डरावना: हिंसा की पौध तैयार कर रहा है IIT Mandi का माइंड ट्री स्कूल

बच्चे मन के सच्चे,वो अबोध है उनको सिर्फ प्यार, सौहार्द के बारे में शिक्षा दी जाती है क्योकि जैसा उनको सिखाया जाता है वो ही उनकी तालीम बन जाती है  । कच्ची मिटटी की तरह होते है बच्चे, जिस सांचे में ढालो उसी में ढल जाते है। बच्चो के माता पिता उनको नर्सरी से ही अच्छे विद्यालय में भेजते है ताकि उनको एक सम्भ्य, नैतिक एवं मिलनसार इंसान बनने का ज्ञान मिल सके, वो प्यार बांटना सीखे, सौहार्द के साथ सबके साथ रहना सीखे। जो हिंसा के तरीके आतंकवादी , बच्चो को आतंक की ट्रेनिंग में सीखाते है वो तरीके माइंड ट्री स्कूल में पडोसी से बदला लेने के लिए दूसरी क्लास के बच्चो को पढ़ाया जा रहा है.   हिंसा के बारे में कोई बात छोटे बच्चो के सामने करता दिखता नहीं , कोई अपराधी भी होता है तो वो भी बच्चो के सामने अपराध की गाथा नहीं सुनाता लेकिन आई आई टी मंडी कैंपस में चल रहे निजी स्कूल माइंड ट्री दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले मासूम बच्चो को पडोसी से बदला लेने के लिए उनके घर में बम फोड़ने, खिड़की पर पत्थर की बारिश करना जैसी कहानी बता रहा है, वाकई यह शर्मनाक तो है ही लेकिन उससे भी ज्यादा है चिंताजनक, की क्या दूसरी क्लास के

दावा:घाटे में जाती रेलवे, हकीकत:तीन साल में टिकट कैंसलेशन & वेटिंग टिकट से ही कमा लिए 9020 करोड़ से ज्यादा...

भारतीय रेल भले ही घाटे से झूझने की बात कर रही हो और इसके निजीकरण के लिए अलग अलग तर्क दे रही हो, लेकिन मुझे जो जानकारी सुचना के अधिकार के तहत मिली उससे जो  हकीकत सामने आयी वो वाकई चौकाने वाली है. रेलवे को बिना कुछ करे ही औसतन सालाना 5 करोड़ नहीं, 10  करोड़ नहीं, 100 करोड़ नहीं 500  करोड़ नहीं, पुरे 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हो रही है यह कमाई टिकट कैंसलेशन के चार्जेज एवं वेटिंग टिकट रद्द न हो पाने से हो रही है . 01 जनवरी 2017 से लेकर 31  जनवरी 2020 तक रेलवे ने 9020,54,21,351 रुपये इसी तरह कमा लिए और अपने धन में इजाफा किया . File Photo   मेने सेंटर फॉर रेलवे इनफार्मेशन सिस्टम (CFRIS) से सुचना के अधिकार के तहत आवेदन करके विब्भिन तरह के 6 सवाल पूछे थे जिनके माद्यम से जानना चाहा की वेटिंग टिकट जो चार्ट बनने के बाद भी वेटिंग रहे और कैंसल नहीं हो पाए ऐसे टिकट की संख्या बताओ एवं ऐसे टिकट से पिछले तीन साल में रेलवे को कितना धन अर्जन हुआ? रेलवे को पिछले तीन साल में विब्भिन श्रेणी के रिजर्वेशन टिकट कैंसलेशन चार्जेज से कितना धन अर्जन हुआ और ऐसे टिकट की संख्या बताओ? कितने कन्फर्म

मुख्य चयन कर्ता को प्रोग्राम में बुलाया, कहीं Director के चयन को प्रभावित करने की साजिश तो नहीं - IIT Ropar

हमे आदत है जी हुजूरी की क्योकि विश्वास नहीं खुद की काबिलियत पर,  करने दो चापलूसी थोड़ी मुझे भी, टुकड़ा जो बड़ा पाना है...   यह लाइन सटीक बैठती है रोपड़ पर, जहाँ अभी बीते रविवार, 09.02.2020 को एक प्रोग्राम  " ADVITYA 2020 " के नाम पर डॉ राधाकृष्णनन,चैयरमेन स्टैंडिंग कमिटी आई आई टी कौंसिल( Chairmen, SCIC)   को बुलाया गया क्योकि वो निर्देशक आई आई टी रोपड़ के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे जो की आने वाले महीनो में या इसी महीने भी आयोजित किया जा सकता है । कहा जा रहा है, वर्त्तमान निर्देशक महोदय ने आई आई टी रोपड़ का निर्देशक दुबारा बनने के लिए आवेदन किया है और उनका टेन्योर .जून 2020 को खत्म हो रहा है. मंत्रालय ने आई आई टी रोपड़ निर्देशक पद के लिए आवेदन मांगे थे जिसमे कई उम्मीदवारों ने आवेदन किया और अपने उज्जवल भविष्य के लिए एक उम्मीद जताई. आवेदन करने की लास्ट डेट 15 जनवरी 2020 के आस पास थी. उन सभी आवेदनकर्ता को उम्मीद एवं आशा है की इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाले पद पर चयन पूरी तरह निष्पक्ष एवं फेयर होगा लेकिन निर्देशक आई आई टी रोपड़ का इस तरह चयन समीति के महत्वपूर्ण पद पर आसीन स

RMAT-2008 में रात दिन एक करने वालो का नहीं दिया अभी तक मेहताना, RTU ये किसी कार्यप्रणाली है तेरी ?

राजस्थान की पहली तकनिकी यूनिवर्सिटी कोटा में वर्ष 2006 में खोली गयी , उसके बाद कई तरह के एग्जाम भी यूनिवर्सिटी ने ही कंडक्ट करवाए उनमे से एक था MBA कोर्स में दाखिले के लिए एंट्रेंस एग्जाम RMAT-2008.  इस एग्जाम को करवाने के लिए यूनिवर्सिटी ने कई कर्मचारियों को तैनात किया उनमे से अधिकतर यूनिवर्सिटी के ही कर्मचारी थे जो  दिन में अपनी ड्यूटी करते और  ड्यूटी टाइम के बाद ओवर टाइम करके कुछ मेहनताना हासिल करना चाहते ताकि अपने परिवार को कुछ वित्तीय सहायता कर सके। लगभग 20  लोग ऐसे थे जिन्होंने पूरी रात भर कई महीनो तक काम किया, जिनमे से कुछ की हाजिरी तो  210  दिन तक रही दूसरे शब्दों में कहे तो 210 रात कर्मचारियों ने  काम किया लेकिन उनको एवज में मिला "ठेंगा"।  धन अर्जन करना चाहते थे यह लोग वो भी ओवर टाइम की मेहनत से , लेकिन सालो तक जब उसी मेहनत का फल न मिले तो मन में टीस सी रह जाती है. यह हुआ उन सभी लोगो के साथ जिन्होंने ऑफिस समय के बाद पुरे प्रदेश में होने वाले RMAT-2008 के एंट्रेंस एग्जाम को करवाने के लिए जी तोड़ रात-दिन मेहनत की। जिनेम 1  कोर्डिनेटर, 10 को-कोऑर्डिनेटर के साथ स्टाफ