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यदि आप रेलवे में कैटरिंग का सामान खरीद रहे है तो जरूर पड़े इस ब्लॉग को क्या पता शायद आपको भी कोर्ट का रुख करना पड जाये... ...

व्यवस्था सुधारने के लिए करे कितने जतन लेकिन वो भी पड गए कम , एक बार अपनों से पूछ लिया होता तो न परेशां आप होते न हम.. यही किस्सा इंडियन रेलवे पर लागु होता है ..अभी भी 35 Rs  का मामला कोर्ट में लेकर गया ,बात यहाँ 35रुपये की नहीं रेलवे की उदासीनता एवं यात्रियों के साथ किये जा रहे धोखे की है की किस तरह से यात्री के विश्वास को तोडा जाता है ... उसी का अगला उदारहरण है जो इस ब्लॉग में आपसे कहने जा रहा हु .... यदिआप  रेलवे में कैटरिंग का सामान खरीद रहे है तो जरूर पड़े इस ब्लॉग को क्या पता शायद आप भी कोर्ट की तरफ रुख कर सके .... My previous blog link regarding this issue dated 12.12.2017 जुलाई 01, 2017 से होटल, रेस्ट्रोरेन्ट आदि पर 18%GST के साथ खाने पिने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था, जिससे रेलवे कैटरिंग में भी  18%GST  से खाने पिने की कीमतों में उछाल आया, लेकिन  गुजरात चुनाव से पहले लोगो को लुभाने के लिए 23rd GST कौंसिल में निर्णय हुआ की सभी होटल ,रेस्ट्रोरेन्ट जिसमे खाने पिने की चीजे परोसी जाती है उनमे 18% से सीधे 5%  GST  ही लिया जायेग...

कठुआ & उन्नाव पर रोष..बाकि की बेटियों पर खामोश???

कठुआ & उन्नाव पर रोष..बाकि की बेटियों पर खामोश??? आ की तरह ही सब बेटियों के लिए न्याय की मांग करते तो शायद आज राजनीती गलियारों में इतनी हलचल न होती .... आ के साथ हर बेटी का हक़ है न्याय मिलना...चाहे मुजरिम तिलक राज हो या मेलम आलम 8 साल की आ पर हुई दरिंदगी ने पुरे देश को झकझोर दिया...होना भी चाहिए आखिर वर्दी वाला ही गुंडा निकला, तिलकधारी ही वहशी निकला....मंदिर जैसी पवित्र जगह पर तीन दिन तक रखा उस बच्ची को...फिर दफ़न करने के लिए २ गज जमीन तक नहीं दी गयी ....क्रूरता की सारी हदें पार की ... उसी तरह उन्नाव में भी हुआ विधायक जी ने एक बच्ची की अस्मत लूट ली और उसी के गुंडे भाई ने उसके ही पिता की निर्मम हत्या करवा दी ....दिल दहल जाता है है ऐसे वाकये सुनकर...इन लोगो को भारत के कानून से नहीं किसी अरब देश के कानून के हिसाब से सजा देनी चाहिए .... हमे दीपिका सिंह राजावत जैसी कद्दावर वकीलों की तारीफ करनी चाहिए जो कठुआ केस में आ को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रही रही है ...दीपिका इंदिरा जयसिंह के NGO   के लिए काम करती है ....लेकिन दुःख हुआ जानकर के इंदिरा जयसिंह  जो की नेशनल एडिशनल सॉलिसिटर...

हैवानियत का दूसरा नाम "कठुआ" गैंगरेप....क्या हिन्दू-मुसलमान कर करके मानवता को जिन्दा जला दिया हमने?

तूने न इतनी सी उम्र में कितनी बड़ी कीमत चुकाई ...पुरे हिंदुस्तान को कर्जदार कर दिया ... कुछ तो चले थे आबरू कमाने ..तूने आज हम सब को नीलाम कर दिया ... 2010 में मोहम्मद यूसुफ़ ने अपनी बहन की बेटी को गोद ले लिया था। बकरवाल घुमंतू समुदाय के यूसुफ़ ने जम्मू को अपना ठिकाना बना लिया था जहां पांच साल से इस समुदाय को लेकर डोगरा हिन्दुओं के मन में आबादी का भय खड़ा किया जा रहा था। रोहिंग्या मुसलमानों के यहां बसाए जाने से भी इसे हवा मिली कि आबादी का संतुलन बदल रहा है। आप जानते हैं कि आबादी का भय कौन खड़ा करता है। इनके भीतर का ज़हर ऊपर आने लगा कि कहीं जम्मू में भी मुसलमान न भर जाएं।  शक और नफ़रत ने आठ साल की बच्ची को अपना शिकार बना लिया। आप चार्जशीट पढ़िए तो आपके भीतर बैठी उस भीड़ का ख़ौफ़नाक़ चेहरा नज़र आने लगेगा। चार्जशीट में लिखा है कि इस हत्या में मंदिर का पुजारी 60 साल का सांझी राम और पुलिस अफ़सर दीपक खजुरिया शामिल है। इलाक़े से बकरवाल को भगाने की प्लानिंग कर रहे सांझी राम की नज़र कई दिनों से इस बच्ची पर थी। अक्सर टट्टूओं को चराने ले जाती थी। सांझी राम ने यह प्लान दीपक खजुरिया, अपने ...

चुनाव व्यवस्था पर उठाये थे सवाल, राज्य चुनाव आयोग ने दिए थे जाँच के आदेश किन्तु 3 महीनो में भी नहीं हुई जाँच ...

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बारे में दिसम्बर में दिए गए फीडबैक पर राज्य मुख्य चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री के गृह जिले मंडी के जिला चुनाव अधिकारी से जवाब माँगा था किन्तु 28 दिसम्बर 2017 के लिखे हुए पत्र पर अभी तक भी जिला चुनाव अधिकारी ने कोई संज्ञान नहीं लिया, क्या इसी तरह से सुधारेंगे चुनाव व्यवस्था ? यदि कोई भारतीय अपनी जिम्मेदारी समझ कर ,बहुमूल्य समय देकर कुछ फीडबैक देता है ताकि आगे से व्यवस्था सुधर सके तो चुनाव आयोग को खुश होकर इस तरह के कदम का स्वागत करना चाहिए किन्तु यहाँ केंद्रीय चुनाव आयोग ने तो इस पर संज्ञान लेना तक जरुरी नहीं समझा एवं राज्य चुनाव आयोग ने जिला चुनाव अधिकारी से रिपोर्ट मांगने का पत्र भेज कर इति-श्री  कर ली और उन्ही से एक कदम आगे बढ़कर जिला चुनाव अधिकारी निकले, जिन्होंने शायद इस पत्र को कोई तव्वजो ही नहीं दी ....इसका सारांश यह निकला की, आम इंसान के द्वारा यदि देश में बदलाव लाने की जो बड़ी बड़ी बातें की जाती है वो सिर्फ कागजी या हवाई बातें ही होती है हकीकत का उनसे कोई सरोकार नहीं ...और इसीलिए शायद आम इंसान सिस्टम को अपना लेता है... प्रधा...

बजट वाले दिन चूर चूर हुआ बीजेपी का घमंड....क्या कांग्रेस की शुरुआत या बीजेपी को सबक है बंगाल और राजस्थान का परिणाम?

2013 में मिली बम्पर जीत के बाद शायद अब बीजेपी की चमक राजस्थान में खोने लगी है तब ही 200 में से 163 विधानसभा एवं 25 में से 25 लोकसभा सीट जीत कर इतिहास रचने वाली बीजेपी अगले चुनाव के ठीक पहले उपचुनाव में तीनो सीट बुरी ( 2 लोकसभा एवं 1 विधानसभा ) तरह से हार कर शायद आत्मचिंतन की और अग्रसर होगी ... अलवर सीट से कांग्रेस उम्‍मीदवार करण सिंह यादव ने भाजपा के जसवंत सिंह यादव को 1,56,319 वोट से हरा दिया है। अजमेर में भी कांग्रेस के रघु शर्मा ने जीत दर्ज की है।इसके अलावा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक धाकड़ ने भाजपा के शक्ति सिंह को 12,976 मतों से हरा दिया । यही नहीं पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस ने नोआपारा विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर बीजेपी के मंसूबो पर पानी फेर सिद्ध किया किआ की बीजेपी की दाल बंगाल मे अभी गलने वाली नहीं , तृणमूल के सुनील सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के संदीप बनर्जी को 63,000 से ज्यादा मतों से मात दी। इसलिए हुए उपचुनाव   राजस्थान में अजमेर लोकसभा सीट सांवरलाल जाट के निधन के बाद खाली हुई थी। वहीं अलवर लोकसभा सीट महंत चांदनाथ के...

उच्च शिक्षण संस्थानों में दबायी जा रही आउट सोर्स कर्मचारियों की आवाज....

तमाम नियम बना डाले, कई कायदे बना डाले करा झमेला ज़माने भर का ,लेकिन हकीकत पर तुमने जुबां पर ताले लगा डाले...... तमाम एक्ट, नियम कायदे बनाये जाते है ताकि भारत में रहने वाले हर तबके के इंसान के साथ न्याय हो, लेकिन जब उच्च शिक्षण संसथान ही उनके यहाँ कार्यरत आउट सोर्स स्टाफ के साथ भेदभाव करे ,उनके हक़ के लिए कोई कदम न उठाये तो यह एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है-ऐसा ही प्रतीत हुआ देश के सर्वोच्च उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक संस्थान आई आई टी, दिल्ली से प्राप्त उत्तर में जिसमे बताया गया की आउट सोरस कर्मचारियों को हम नहीं चलाते बल्कि एक एजेंसी के द्वारा चलाया जाता है, और हम किसी भी आउट सोर्स कर्मचारी को बोनस नहीं देते, साथ में संस्थान ने बताया की शिक्षण संस्थान के कर्मचारियों को इस एक्ट में छूट दी गयी है ..और तो और संस्थान ने आउट सोर्स कर्मचारिर्यो की सूचि भी उपलब्ध नहीं करवाई जो बोनस के लिए उपयुक्त है .... जबकि वही के कुछ आउट सोर्स कर्मचारियों ने मुझे बताया था की उनको बोनस नहीं दिया जाता और हमारी सारी डिटेल आई आई टी प्रबंधक के पास है अत यह कहना की हमारे पास कर्मचारियो की सूचि नहीं यह सफ़ेद झ...

रेलवे कैटरिंग में अभी भी 18% GST???, क्या रेलवे बोर्ड को यात्रिओ को लूटना सही लगता है? या लोगो की आँखों में धूल झोंकना पसंद है रेलवे को?

चुनाव की सरगर्मी से पहले जब लोगो में रोष पसरा हुआ था तब अरुण जेटली जी ने GST के सन्दर्भ में मीटिंग बुलाई और तय किया की होटल आदि में जहां खाद्य पदार्थ की बिक्री होती है उसमे  GST   18% से 5% कर दिया जाये ....यह छूट चुनाव में वोटर को लुभाने के लिए बहुत अच्छी रही...  डोमिनोज़, मैक डी, होटल आदि में जब  GST 18%  से 5 % आने के बाद कीमते कम नहीं हुई तो सरकारी महकमे  के साथ...आम जनो में भी रोष व्याप्त हो गया था..और हो भी क्यों नहीं आखिर प्राइवेट है तब भी लोगो का हित सर्वोपरि है....और इसी वजह से सरकार को अपील करनी पड़ी की सभी फ़ूड कम्पनी को प्रोडक्ट के बड़े हुए दाम कम करके आम जन को राहत देनी चाहिए .... लेकिन जब बात रेलवे की आती है तो सरकार क्यों भूल जाती है की रेलवे से भी लोगो को हर जगह चुना लगाया जा रहा है ..या यु कह ले रेलवे की मोबाइल कैटरिंग में बिल नहीं दिया जाता ..अत:लोगो की आँखों में धूल झोंकना आसान है ... जी हा...ऐसा ही प्रतीत होता है रेलवे के रवैये से .... रेलवे की स्टैटिक कैटरिंग में 5% तो मोबाइल  कैटरिंग में 18% GST क्यों? जी हा ,रेलवे ...