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तिल का तेल अमृत से कम नहीं, 200 % तक फिट रहने के लिए सर्दी में भरपूर करे उपयोग.

 यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा. तिल के तेल में इतनी ताकत होती है यह पत्थर को भी चीर देता है.कहा जाता है कि अगर कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दे और कुछ दिन बाद देखें, तो तिल का तेल, पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. इसीलिए इस तेल की मालिश करने से हड्डिया मजबूत होती है. तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती में अहम भूमिका अदा करता है.  तेल शब्द की उत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है तथा तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी  का ही प्रयोग करना चाहिए.  क्या होता है तिल के तेल में?  सौ ग्राम सफेद तिल से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है। काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है। तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है। तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्...

22 वर्षो में भारतीय रेल हादसों की घटनाओ में आयी जबरदस्त कमी, सन 2000-01 के मुकाबले 2021-22 में रह गयी मात्र 2.3%

रेल हादसों में होने वाली जनहानि भी हुई न के बराबर.वर्ष 2002-03 में 1429 (मौत एवं घायल)  जनहानि की तुलना में वर्ष 2021-22 में यह संख्या मात्र 6  रही. कई वर्षो पहले भारत में ट्रैन हादसों की खबरे आम हुआ करती थी. आये दिन पढ़ा जाता थी की उक्त स्थान पर ट्रैन हादसा हुआ जिसमे कई लोग अपनी जान गावं बैठे तथा कई घायल हो गए लेकिन अब यह खबर देखने को नहीं मिलती.भारतीय रेलवे द्वारा रेलवे परिवहन में कई तरह के सुधार करने के साथ-साथ यात्रियों को अनेको सुविधाएं प्रदान करने का दावा किया जा रहा है और अमूमन देखने को मिल भी रहा है की भारतीय रेलवे अब सुविधाओं के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.  भारतीय  रेलवे परिवहन  में वाई-फाई, कैटरिंग,समय-सारणी, लेट-लतीफी, साफ-सफाई, शिकायत निस्तारण, प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली सुविधाएं  को मिलाकर देखा जाये तो इन कुछ वर्षो में अनेको सुधार देखने को मिले है लेकिन रेल हादसों को लेकर 22 वर्षो का जो डाटा निकल कर सामने आया है उसे देखकर कहा जा सकता है की भारतीय रेलवे परिवहन विभाग ने यात्रियों की जानमाल का विशेष ध्यान रखते हुए हादसो...

आरटीयू: 10 वर्षो से अटकी पड़ी है अशैक्षणिक पदों पर भर्ती, फॉर्म फीस के नाम पर वसूली 1 करोड़ से ज्यादा की रकम

2011-12 में निकली कनिष्ठ लिपिक, स्टेनोग्राफर की भर्ती अभी तक नहीं हुई पूर्ण    राजस्थान की पहली तकनिकी यूनिवर्सिटी में स्टाफ की भारी कमी तो है ही साथ ही यूनिवर्सिटी ने बेरोजगारी में नौकरी की उम्मीद लगाए अभ्यर्थियों से भद्दा मजाक भी कर लिया. यूनिवर्सिटी ने नौकरी की आस में फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों से फॉर्म फीस के नाम पर 1 करोड़ से ज्यादा की रकम तो वसूल कर ली लेकिन 2011 में निकली भर्ती अभी तक भी पूर्ण नहीं की. यह जानकारी सुचना के अधिकार के तहत मिले डाटा से निकल कर सामने आयी है. मेने आरटीयू में सुचना के अधिकार के तहत यूनिवर्सिटी में वर्ष 2010 से अब तक निकाली गयी विभिन्न पदों के लिए भर्ती एवं उक्त भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों की संख्या, एप्लीकेशन फॉर्म फीस से एकत्र की गयी धन राशि और जो भर्ती अभी तक अटकी हुई है का कारण सम्बन्धी जानकारी मांगी थी. जिसका उत्तर अनुभाग अधिकारी अजय सिंह पवांर ने उपलब्ध करवाया. प्राप्त उत्तर से स्पष्ट हुआ की वर्ष 2011 में निकली कनिष्ठ सहायक ( लिपिक) की भर्ती 2021 तक भी पूर्ण नहीं हो सकी. अटकी है अशैक्षणिक स्टाफ की भर्ती- वर्ष 2011 में कनिष्ठ सहायक( लिपिक ...

राजस्थान का पहला तकनिकी विश्वविद्यालय RTU कोटा तरस रहा स्टाफ के लिए, है मात्र 41.40% कर्मचारी के भरोसे

 रिक्त पड़े है 64% से ज्यादा शैक्षणिक एवं 54% से ज्यादा अशैक्षणिक पद वर्ष 2006 में कोटा में राजस्थान के पहले तकनिकी विश्वविद्यालय RTU कोटा को खोला गया था ताकि राजस्थान में तकनिकी शिक्षा को नए आयाम मिल सके लेकिन इसे स्थापित किये 15 साल भी नहीं हुए की इसमें कर्मचारियों का टोटा हो गया. विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक दोनों कर्मचारियों की रिक्तिया चल रही है. आर टी यू में लगभग 60 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पंजीकृत है तथा 90 से ज्यादा कॉलेज एफिलिएटेड है. आर टी यू कोटा में  शैक्षणिक पद में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर के 261 सेंक्शन पदों में से मात्र 93 पद भरे है जबकि 168 पद खाली पड़े है.अशैक्षणिक कर्मचारियों में 382 सेंक्शन पदों में से 173 पद भरे है जबकि 209 पद खाली पड़े है. प्रोफेसर के 37 पदों में से 26 पद खाली है जिसमे एरोनॉटिकल,पेट्रोलियम, आदि को मिलाकर कुल 20 संकायों में से 13 में एक भी प्रोफेसर नहीं है. एसोसिएट प्रोफेसर के 68 पदों में से 51 पद रिक्त है जिसमे 10 संकायों में एक भी एसोसिएट प्रोफेसर नहीं है. असिस्टेंट प्रोफेसर के 156 पदों में से 91 पद रिक्...

सात महीनो में मात्र 7.5% लोगो का ही हुआ कोरोना वेक्सिनेशन पूरा,10 करोड़ 41 लाख 91 हजार 118 लोगो को ही लगी सेकंड डोज़

18 से 44 वर्ष आयु ग्रुप वाले वैक्सीन की फर्स्ट डोज़ में सबसे आगे तो सेकंड डोज़ में सबसे पीछे. कोरोना वायरस से बचाव का एक मात्र उपाय इसकी वैक्सीन ही है. इसकी दोनों डोज़ लेने के बाद ही कोरोना से लड़ा जा सकता है.लेकिन 138 करोड़ की जनसँख्या वाले भारत में अभी तक आधी आबादी को कोरोना वैक्सीन की प्रथम डोज़ भी नसीब नहीं हुई जबकि देश में कोरोना वेक्सिनेशन की शुरुआत 16 जनवरी को से हुई थी. देश के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को और रफ़्तार पकड़ना अभी बाकि है.सात महीने बीतने के बाद भी केवल 34.20% लोगो को ही वैक्सीन की डोज़ लग पायी है.  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 31 जुलाई तक देश में हुए टीकेकरण की स्थिति स्पष्ट की. विभाग ने विभिन्न श्रेणियों में लगे टीके का आंकड़ा उपलब्ध करवाया साथ ही प्रत्येक राज्य को जनवरी से जुलाई 23 तक कितनी-कितनी वैक्सीन दी उसका डाटा भी मुहैया करवाया.  दिए गए जवाब में बताया की 31 जुलाई 2021 तक देश में कुल 10 करोड़ 41 लाख 91 हजार 118 लोगो का ही वेक्सिनेशन अब तक पूरा हो पाया है यानि की जिनको कोरोना की फर्स्ट & सेकंड, दोनों डोज़ लगायी गयी है जबकि 36 करोड़ 78 लाख 43 हजार  ...

4 IITs, 6 IIITs, 5 NITs लम्बे समय से चल रहे बिना नियमित निर्देशक के, साथ ही 8 IITs में बोर्ड ऑफ़ गवर्नर का चैयरमेन भी नियुक्त नहीं

 18 महीनो से ज्यादा समय से खाली है आई आई टी मंडी एवं आई आई टी इंदौर में निर्देशक का पद तो दो ट्रीपल आई टी को है सालो से अपने नियमित निर्देशक का इंतजार. यूनियन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया था की पांच आई आई टी और एन आई टी संस्थानों में नियमित निर्देशक के पद खाली पड़े है साथ ही 29 बोर्ड ऑफ़ गवर्नर चैयरमेन के पद भी विभिन्न आई आई टी एवं एन आई टी में खाली पड़े है. इसी विषय में मेरी आर टी आई के संदर्भ में शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर से पता चला है दो आई आई टी में 18 महीनो से अधिक तो 1 आई आई टी में 12 महीने से अधिक समय से नियमित निर्देशक का पद खाली है जबकि 1 ट्रिपल आई टी में वर्ष 2013-14 तो दूसरी ट्रिपल आई टी में वर्ष 2015-16 से ही निर्देशक का पद खाली चल रहा है. राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में खाली पड़े इन पदों को भरने में शिक्षा मंत्रालय ने कोई खास रूचि नहीं रखी.हालाँकि यूनियन मिनिस्टर ने पांच आई आई टी में निर्देशक के पद खाली होने का जवाब लोकसभा में 19 जुलाई को दिया जबकि 13 जुलाई को मंत्रालय के द्वारा मुझे दिए गए उत्तर में चार आई आई टी में न...

आई आई टी मंडी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ भरत ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, साइटेशन स्कोर एक साल में गिरा औंधे मुँह, 6645 से रह गया मात्र 745

इंसान गलतियों का पुतला होता है और इंसान से गलती होना आम बात है, लेकिन समय रहते गलती को स्वीकार कर उसमे सुधार कर लेना ही एक महान इंसान की पहचान है. भले ही उस गलती को सुधार करने से उसकी इज्जत की धज्जिया उड़ जाये, वो हंसी का पात्र बन जाये लेकिन फिर भी उसका कद कही ऊँचा हो जाता है. हालाँकि कई बार गलती सुधारने के लिए ऊपर से दबाव भी डाला जाता है तब जाकर इंसान मन मानकर गलती सुधारता है.          आई आई टी मंडी तो शुरू से रिकॉर्ड बनाने में अव्वल रहा है. इसी में एक नाम और जुड़ गया डॉ भरत सिंह राजपुरोहित का.आई आई टी मंडी के तत्कालीन डीन फैकल्टी डॉ भरत सिंह राजपुरोहित ने अपने गूगल स्कॉलर में सुधार कर लिया है लेकिन पहले जो बड़ा चढ़ा कर जो डाटा बता रखा था और उससे जो फायदा उठाया उसके प्रायश्चित के बारे में क्या किया ? यह विचार योग्य है.आई आई टी मंडी को भी उनको प्रायश्चित करने का मौका देना चाहिए और उनके ऊपर संज्ञान लेना चाहिए. मुझे उम्मीद है इस बड़े हुए डाटा से जो भी फायदा उन्होंने उठाया उसको पूरी ईमानदारी से सूत समेत वापस लोटा देंगे डॉ साहब. गत वर्ष दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्स...