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आई आई टी रोपड़, स्टाफ नर्स भर्ती में तो हद ही कर दी...जिसको माना अपात्र उसी को करवा दिया लिखित परीक्षा में टॉप

आई आई टी मंडी, आई आई टी गुवाहाटी के बाद अब आई आई टी रोपर मे भर्ती में हो रही अनियिमितता एवं अन्य की शिकयतें लगातार आ रही है, जिनको मंत्रालय तक पंहुचा रहा हु, सीधे चीफ सेक्रेटरी तक। लेकिन दुर्भाग्य है चीफ सेक्रेटरी कुछ करते नहीं वो बस आश्वासन देते है खेर कोई नहीं, जल्द आई आई टी रोपड़ के लिए भी शायद हाई कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचने वाले है , और चंडीगढ़ के वकील साहब तो बड़े ही धुरन्धर है। लेकिन सोचने की बात है , आजकल हिंदुस्तान पेट्रोलिम, डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सोनल ट्रेनिंग, सेण्टर विजिलेंस डिपार्टमेंट लोगो को तरह-तरह के मैसेज भेजकर बोल रहे है की करप्शन हटाओ अभियान में शपथ लीजिये  और अपना सर्टिफिकेट डाउनलोड कीजिये, यह बिलकुल ऐसा है जैसे गंजे के सर पर कंगी करना। सरकार यह ढोंग कर क्यों रही है जब करप्शन के ऊपर कोई कारवाही करनी है नहीं तो ? लोग भी पागल की तरह  देशभक्ति में, गुब्बारे की तरह ही फूल रहे है, सर्टिफिकेट डाउनलोड करके ऐसे जैसे बस अब करप्शन के खिलाफ अंतिम जंग की तैयारी में सबसे बड़े सिपाही वो ही है, अरे देशभक्तो यह तो बताओ CERTIFICATE  डाउनलोड करने के बाद आपने देशहित में कित...

निजी कृषि विश्वविद्यालय पर राज्य सरकार की दरियादिली एवं छात्रों के साथ धोखा, रिक्त रही 57% सीटों के लिए लाखो रुपये से करवाया अतरिक्त जेट जेट

कांग्रेस देश में गिनती के राज्यों में ही सरकार में होने का स्वाद चख रही है, और जहां है वहां भी आपसी तालमेल और आतंरिक कलह में उलझी हुई है जिसका खामियाजा आम जन को भुगतना पड़ रहा है और अब राजस्थान में भी अंधी कांग्रेस सरकार की एक गलत नीति या यु कहे जानभूझकर "गलती " करने वाली नीति से हजारो विद्यार्थियों का तो भविष्य अंधकार में है ही लेकिन अब सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े करने में कोई संकोच नहीं है,मामला है निजी विश्विद्यालयों को फायदा पहुंचाने का । राजस्थान में कांग्रेस सरकार का गुपचुप तरीके से निजी कृषि विश्विद्यालयों  में रिक्त रही आधी से ( 57% ) ज्यादा सीटों को भरने के लिए अधिकारियो पर अनैतिक दबाव डालकर, सुझावों को सिरे से ख़ारिज करते हुए  दुबारा जेट की परीक्षा करवाना, सरकारी पैसे का दुरूपयोग, सरकारी सिस्टम का मिसयूज एवं  विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के साथ-साथ, सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान खड़े करता है । जहां भारतीय कृषि अनुसन्धान दिल्ली (ICAR) ने साफ तोर पर निर्देश जारी कर कहा है की निजी विश्वविद्यालय जो नॉन अक्रेडट है से पास आउट विद्यार्थियों को...

आई आई टी की लाचारी पर चुप रहने वालो, अगला नंबर आपका है...

देव भूमि, मंडी शहर में शांत वातारवरण की आगोश में चल रहे आई आई टी मंडी को वही के कुछ गद्दारो ने बीमार कर दिया, आई आई टी मंडी लहूलुहान स्थिति में बिना आंखे टिमटिमाये देखता रहा कोई तो भूमि का कर्ज चुकाएगा, देव भूमि पर मुझे लाने वाले मेरी आबरू को लूटते नहीं देख पाएंगे जरूर वो वक्त आएगा जब इन गद्दारो को सबक सिखाया जायेगा और पूछा जायेगा की ,देव भूमि पर तुमको अपने आंचल में पालने वाली आई आई टी के दामन को तुमने क्यों अपने पैरो तले रोंदा है ?      लेकिन अफ़सोस हिमाचल के निवासियों ने तो जैसे आई आई टी मंडी से नाता ही तोड़ लिया हो , उनको तो मतलब ही नहीं आई आई टी से । में पूछना चाहता हूँ उन हिमाचली लोगो से जो छुप छुप कर मुझे फोन करके मदद मांगते है और बोलते है की आई आई टी के गदारो को आप ही सबक सिखवा सकते हो, क्या वो अपने हिमाचल के लिए कुछ करेंगे या सिर्फ अपने स्वार्थ के पैरो तले दबे होकर बाहरी लोगो से ही मदद मांगते रहेंगे ? चाहे मुद्दा गरीब सुरक्षा कर्मियों जिनसे 5000 रुपये तक का फाइन ( हफ्ता वसूली)का हो या उनको डरा कर ट्रांसफर कर चंडीगढ़ भेजने का, टुच्चा सिंह जी आप तो शर्म ही कर लो,...

कश्मीर तो हो गया,अब कश्मीरियों को पाना है,हमने जमीन के टुकड़े को नहीं, कश्मीरियत को भारत बनाया है ..

आज हर भारतीय को कश्मीर पर हुए फैसले पर गर्व भी है और ख़ुशी भी लेकिन , हम भारतीय को इस जीत पर गर्व करना चाहिए न की कश्मीर के लोगो का उपहास, आज यदि हम लोग उनका स्वागत करने की बजाय तिरस्कार करेंगे, उपहास उड़ायेंगे तो हम कश्मीर की ज़मीन तो पूर्णतया पा लेंगे लेकिन कश्मीरियत  को नहीं पा सकेंगे और किसी भी राज्य की धरोहर उनके लोगो से ही है...न की ज़मीन के टुकड़े से । उनकी भावनाओ का सम्मान करते हुए, अब हर भारतीय के सामने चुनौती होगी की कश्मीरियों को कैसे भारत की मुख्यधारा से जोड़ा जाये क्योकि आजतक उनको देशद्रोही ताकतों ने निजी स्वार्थ के लिए भारत एवं भारतीय को उनका दुश्मन बता रखा था, कल के कदम से उनके अंदर यह भावनाये और भड़क सकती है लेकिन अब हमें मौका मिला है उनको इतना सम्मान दे की वो खुद समझ जाये की उन्होंने जो आज पाया है वो उनके इतने सालो से वो क्यों गुमराह हुए , और यह अहसास सरकार नहीं हमको उनको करवाना है, हो सकता है आज वो दुखी हो क्योकि उनको यह लग रहा है  उनका कश्मीर, उनकी ज़मीन, उनका रोजगार, उनकी संस्कृति सब भारत ने बंदूकों के दम पर छीन ली है , उनको यह गुमराह किया गय...

धन, दौलत और सच्चाई...

मन के कुछ विचार ... मरने पर पैसा भले ही साथ न जाये लेकिन यह सत्य है अंतिम साँस तक सिर्फ वो है जो आपको जिन्दा रख सकता है । "धन के पीछे मत भागो" कहने वाले लोग खुद भाषण देने से पहले अपनी मोटी फीस बता देते है "धन से कुछ नहीं होता, असली दौलत सिर्फ परिवार है" यह लाइन सुनने और पढ़ने में ही अच्छी लगती है, महंगी साडी, बच्चो की स्कूल फीस और उनके शोक पुरे न हो तो वो ही परिवार आपको खाने दौड़ता है धन ही सब कुछ नहीं है, लेकिन धन है तो बहुत कुछ है और धन ही नहीं तो कुछ भी नहीं इंसान के विचारो की नहीं, इज्जत उसकी जेब की होती है कुनबे और खानदान में सम्मान उसे मिलता है,जिसका समय अच्छा होता है जिसके पास दिखाने के नोट होते है, उसके सारे खोट नोट के पीछे छिपे होते है वजन इंसान का नहीं, उसके अकाउंट में पड़े धन का होता है सत्य वही कहलाता है जो वजन वाला इंसान कहता है बात उसी की सुनी जाती है, जो धनबल से सक्षम होता है आपकी बात में दम तब होगा, जब आपका पर्स दुसरो की अपेक्षा ज्यादा भारी होगा ...

आई आई टी मंडी से कोर्ट के द्वारा मांगे गए जवाब से क्या खुश होना चाहिए?

नियत साफ और हौसला बुलुंद हो तो लक्ष्य मुष्किल हो सकता है नामुमकिन नहीं, सवेरा तो अमावस की घनघोर रात के बाद भी होता है , सूरज तो घनघोर काले बादल के बाद भी निकलता है, हाँ ये जरूर है उस अमावस की रात में न जाने कितने साथ छोड़ जाते है , काले बादल के साथ गरजने वाली बिजली के डर से  हाथ अपने ही छिटक जाते है। न जाने कितनी शिकायते, न जाने कितने पत्र, न जाने कितने कॉल, मैसेज और ढेर सारे चक्कर काटने के बाद जब अंत में कोर्ट का सहारा लेना पड़ा तो बहुत थकान और निराशा सी  हो चुकी थी, होगी भी क्यों नहीं कही से भी हमारी मदद को कोई आगे नहीं आ रहा था, पुरे एक साल तक अलग-अलग मुद्दे पर जबरदस्त मीडिया ट्रायल होने के बाद भी प्रशासन न जाने कोन सी दुनिया में जा चूका था, सरकार के साथ विपक्ष को पातळ लोक में ढूंढा गया लेकिन जब मिला तो आँख नाक कान सब ख़राब अवस्था में उनके मिले ।    लगभग पुरे 15 महीनो, 50 से ज्यादा पत्र, ढेर सारे ईमेल  के बाद जब कोर्ट की और मुख करा तो सबने ही उम्मीद छोड़ दी थी की देश को लूटने वालो के खिलाफ कोई कारवाही होगी भी सही या नहीं ? लेकिन बस उम्मीद थी तो अनजान राज...

सविधान को चिढ़ाते आई आई टी मंडी में फिर से नियम विरुद्ध हुआ कार्य, ईमानदार ऑफिसर के तबादला, रजिस्ट्रार की पत्नी को अंदर लेने की तैयारी...

देश के जाने माने  शिक्षण संस्थान में तानाशाही चरम पर है, होगी भी क्यों नहीं जहां सरकार का कोई अस्तित्व नहीं वहां सही गलत का फैसला करेगा कौन। राज्य सरकार ने तो पडोसी के बच्चे की तरह आई आई टी के घोटाले पर आंख मूंद ली और केंद्र सरकार के मंत्रालय में साठ-गाठ करके आई आई टी मंडी में मनमर्जी की दुकान सविंधान को मुँह चिड़ा रही है । में भी चौकीदार बोलने वाले चुनाव में खूब वोट पाकर अब मस्त हो चुके है वही न्याय दिलाने का नाम लेने वाले तो जाने कहा बिल में छुप गए । देश का सिस्टम बुरी तरह सड़ चूका है, यहाँ भ्र्ष्टाचार के खिलाफ कारवाही होते देखना मुंगेरी लाल के हसीं सपने जैसा है। यहाँ तक की लाखो रुपये का गबन का आरोप तो CAG भी लगा चुकी है फिर भी क्या, सरकार को क्या मतलब ? ये कोई राजनीति दुश्मनी थोड़े न है जो जाँच करवाए , सीबीआई, ED , पुलिस सब या तो राजनैतिक दुश्मनी के लिए है या फिर गरीब को परशान करने के लये। पड़े लिखे लुटेरों के खिलाफ कोई कारवाही नहीं होगी ऐसी शपथ शायद विभाग के अधिकारी लेकर आते है। इतनी शिकायते लिखने के बावजूद अब तो मेरे लैपटॉप ने मुझसे बात करना बंद कर दिया, उसका कहना है की मे...