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देव भूमि हिमाचल को मिला "कृष्ण भक्त" सादगी और परोपकार के धनि निर्देशक आई आई टी मंडी के लिए,बहुतो के पेट में हो रहा दर्द

हिमाचल आई आई टी मंडी को लगभग 2 वर्षो बाद पुर्णकालिन निर्देशक मिल ही गया है. इससे पहले आई आई टी मंडी में निर्देशक श्री टिमोथी ऐ गोनसाल्वेस थे जिन्होंने 10 वर्षो से भी ऊपर आई आई टी मंडी में निर्देशक के पद पर कार्य किया था.  उनके कार्यकाल के समय कई कोर्ट केस भी हुए, घोटालो के आरोप लगे जो अभी तक उच्च न्यायलय में विचाराधीन है. अब आई आई टी मंडी जो की देव भूमि हिमाचल के सबसे बड़े जिले मंडी में स्थित है, को एक दशक बाद दूसरा, नया पूर्णकालिक निर्देशक मिला है जिनका नाम  श्री "लक्ष्मीधर बेहेरा"है.किन्तु यह दुखद है की उनके निर्देशक नियुक्त करने की घोषणा के बाद एवं पद ग्रहण करने से पूर्व ही उनको बेवजह की कंट्रोवर्सी में खींच लाया गया और एक एजेंडा के तहत नरेटिव सेट कर दिया गया .  यह इसलिए हुआ क्योकि वो तिलकधारी है, श्री कृष्ण के उपासक है,सेवा भावी है , छल कपट, आडम्बर से दूर है. सूट-बूट, कोट-पेंट के बजाय कई बार धोती एवं सादा सा कुर्ता पहन, गले में तुलसी माला धारण कर अपने कर्मो का निर्वहन करते है.      प्रोफ बेहेरा के बारे में थोड़ा सा जान ले... प्रोफ बेहेरा आई आई टी कान...

जिंदगी सुकूनभरी चाहिए तो, किस्मत से मत लड़ो,जो लिखा है उसी को बेहतरीन बना लो...(2)

        अ ब रामु के ताऊजी ने उससे जाने की इजाजत मांगी और साथ ही बाकि दोनों बच्चो का पता माँगा तो रामु दुखी हो गया और बोला की छोटा भाई बबलू यहाँ से 50 किलोमीटर दूर एक गांव में रहता है लेकिन मुन्नी का पता नहीं. ताऊजी उससे विदा होते हुए दूसरे भतीजे बबलू के पास जा पहुंचे.....(1) (2) ताऊजी बबलू को खोजते हुए उसके गाँव पहुंचे वहां चौपाल पर बैठे बुजुर्ग से उसने बबलू के घर का पता पूछा तो बुजुर्ग ने कहा "आप काहे उस बिचारे बबलू का पता पूछ रहे है? पहले उसका गांव में घर था लेकिन अब सब बिक गया और वो खेत में ही एक झोपडी बनाकर बीवी बच्चों के साथ रहता है."  ताऊजी ने कहा "मैं उसका ताऊजी हूँ, एवं वर्षो बाद उससे मिलने आया हूँ. आप बता दीजिये मैं खेत पर ही चला जाऊंगा" इस तरह बुजुर्ग से रास्ता पूछ कर ताऊजी खेत पर पहुँच जाते है. खेत में मौजूद कुटिया को खाली देख वो वही पास में भोजन कर रहे व्यक्ति से बबलू के बारे में पूछते है तो वो एक व्यक्ति की ओर इशारा करके ताऊजी को बबलू का पता बता देता है. ताऊजी खेत में जाते है तथा वहां देखते है कि हल में आगे की एक तरफ बैल और दूजी तरफ एक नौजवान बंधा ह...

जिंदगी सुकूनभरी चाहिए तो, किस्मत से मत लड़ो,जो लिखा है उसी को बेहतरीन बना लो...(1)

अक्सर लोग किस्मत को दोष देते है लेकिन जो मिला है उसमे सुख नहीं ढूंढते, यदि वो जो मिला है उसी को जबरदस्त करने में पूरी शिद्दत से लग जाये तो जीवन शानदार हो जायेगा. हम विधाता के लेख को नहीं बदल सकते लेकिन जो लिखा है उसी से जिंदगी को बेहतरीन बना सकते है. इसके लिए एक कहानी बताता हूँ. उम्मीद करता हूँ आपको कहानी जरूर पसंद आएगी. एक गांव में दो भाई थे उनके पिताजी एवं माताजी का देहांत बचपन में हो गया था. अब दोनों भाई अपनी खेती बाड़ी संभाल कर जीवन यापन कर रहे थे.एक दिन गांव में एक बनिए ने साप्ताहिक जी बिठाई जिसमे सिद्ध महात्मा आये.रोजाना कथा पूरी होने के बाद भोजन प्रसादी के लिए पूरा गांव आया करता था. दोनों भाई भी उस प्रसादी में भोजन ग्रहण करने पहुंच जाते. एक दिन बड़े भाई की तबियत ख़राब होने के कारण वो खेत में नहीं जा पाया. घर पर अकेला रहने से अच्छा उसने सोचा चलो आज साप्ताहिक जी सुन लेते है और फिर भोजन करके घर आ जाएंगे. वो कथा पंडाल में कथा सुनने पहुंच गया. कथा सुनने के बाद बड़े भाई के हृदय में अपार परिवर्तन हुआ और वो भाव भक्ति में लीं रहने लगा. अब उसको खेती बाड़ी करना पसंद नहीं था एक दिन उसने छोटे भाई...

तिल का तेल अमृत से कम नहीं, 200 % तक फिट रहने के लिए सर्दी में भरपूर करे उपयोग.

 यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा. तिल के तेल में इतनी ताकत होती है यह पत्थर को भी चीर देता है.कहा जाता है कि अगर कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दे और कुछ दिन बाद देखें, तो तिल का तेल, पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. इसीलिए इस तेल की मालिश करने से हड्डिया मजबूत होती है. तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती में अहम भूमिका अदा करता है.  तेल शब्द की उत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है तथा तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी  का ही प्रयोग करना चाहिए.  क्या होता है तिल के तेल में?  सौ ग्राम सफेद तिल से 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है। काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है। तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है। तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्...

22 वर्षो में भारतीय रेल हादसों की घटनाओ में आयी जबरदस्त कमी, सन 2000-01 के मुकाबले 2021-22 में रह गयी मात्र 2.3%

रेल हादसों में होने वाली जनहानि भी हुई न के बराबर.वर्ष 2002-03 में 1429 (मौत एवं घायल)  जनहानि की तुलना में वर्ष 2021-22 में यह संख्या मात्र 6  रही. कई वर्षो पहले भारत में ट्रैन हादसों की खबरे आम हुआ करती थी. आये दिन पढ़ा जाता थी की उक्त स्थान पर ट्रैन हादसा हुआ जिसमे कई लोग अपनी जान गावं बैठे तथा कई घायल हो गए लेकिन अब यह खबर देखने को नहीं मिलती.भारतीय रेलवे द्वारा रेलवे परिवहन में कई तरह के सुधार करने के साथ-साथ यात्रियों को अनेको सुविधाएं प्रदान करने का दावा किया जा रहा है और अमूमन देखने को मिल भी रहा है की भारतीय रेलवे अब सुविधाओं के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.  भारतीय  रेलवे परिवहन  में वाई-फाई, कैटरिंग,समय-सारणी, लेट-लतीफी, साफ-सफाई, शिकायत निस्तारण, प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली सुविधाएं  को मिलाकर देखा जाये तो इन कुछ वर्षो में अनेको सुधार देखने को मिले है लेकिन रेल हादसों को लेकर 22 वर्षो का जो डाटा निकल कर सामने आया है उसे देखकर कहा जा सकता है की भारतीय रेलवे परिवहन विभाग ने यात्रियों की जानमाल का विशेष ध्यान रखते हुए हादसो...

आरटीयू: 10 वर्षो से अटकी पड़ी है अशैक्षणिक पदों पर भर्ती, फॉर्म फीस के नाम पर वसूली 1 करोड़ से ज्यादा की रकम

2011-12 में निकली कनिष्ठ लिपिक, स्टेनोग्राफर की भर्ती अभी तक नहीं हुई पूर्ण    राजस्थान की पहली तकनिकी यूनिवर्सिटी में स्टाफ की भारी कमी तो है ही साथ ही यूनिवर्सिटी ने बेरोजगारी में नौकरी की उम्मीद लगाए अभ्यर्थियों से भद्दा मजाक भी कर लिया. यूनिवर्सिटी ने नौकरी की आस में फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों से फॉर्म फीस के नाम पर 1 करोड़ से ज्यादा की रकम तो वसूल कर ली लेकिन 2011 में निकली भर्ती अभी तक भी पूर्ण नहीं की. यह जानकारी सुचना के अधिकार के तहत मिले डाटा से निकल कर सामने आयी है. मेने आरटीयू में सुचना के अधिकार के तहत यूनिवर्सिटी में वर्ष 2010 से अब तक निकाली गयी विभिन्न पदों के लिए भर्ती एवं उक्त भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों की संख्या, एप्लीकेशन फॉर्म फीस से एकत्र की गयी धन राशि और जो भर्ती अभी तक अटकी हुई है का कारण सम्बन्धी जानकारी मांगी थी. जिसका उत्तर अनुभाग अधिकारी अजय सिंह पवांर ने उपलब्ध करवाया. प्राप्त उत्तर से स्पष्ट हुआ की वर्ष 2011 में निकली कनिष्ठ सहायक ( लिपिक) की भर्ती 2021 तक भी पूर्ण नहीं हो सकी. अटकी है अशैक्षणिक स्टाफ की भर्ती- वर्ष 2011 में कनिष्ठ सहायक( लिपिक ...

राजस्थान का पहला तकनिकी विश्वविद्यालय RTU कोटा तरस रहा स्टाफ के लिए, है मात्र 41.40% कर्मचारी के भरोसे

 रिक्त पड़े है 64% से ज्यादा शैक्षणिक एवं 54% से ज्यादा अशैक्षणिक पद वर्ष 2006 में कोटा में राजस्थान के पहले तकनिकी विश्वविद्यालय RTU कोटा को खोला गया था ताकि राजस्थान में तकनिकी शिक्षा को नए आयाम मिल सके लेकिन इसे स्थापित किये 15 साल भी नहीं हुए की इसमें कर्मचारियों का टोटा हो गया. विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक दोनों कर्मचारियों की रिक्तिया चल रही है. आर टी यू में लगभग 60 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पंजीकृत है तथा 90 से ज्यादा कॉलेज एफिलिएटेड है. आर टी यू कोटा में  शैक्षणिक पद में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर के 261 सेंक्शन पदों में से मात्र 93 पद भरे है जबकि 168 पद खाली पड़े है.अशैक्षणिक कर्मचारियों में 382 सेंक्शन पदों में से 173 पद भरे है जबकि 209 पद खाली पड़े है. प्रोफेसर के 37 पदों में से 26 पद खाली है जिसमे एरोनॉटिकल,पेट्रोलियम, आदि को मिलाकर कुल 20 संकायों में से 13 में एक भी प्रोफेसर नहीं है. एसोसिएट प्रोफेसर के 68 पदों में से 51 पद रिक्त है जिसमे 10 संकायों में एक भी एसोसिएट प्रोफेसर नहीं है. असिस्टेंट प्रोफेसर के 156 पदों में से 91 पद रिक्...